Lenskart Controversy: लैंसकार्ट चश्मा बनाने वाली कंपनी है. लैंसकार्ट ने 27 पन्ने के अपने ड्रैस कोड ‘स्टाइल गाइड’ में धार्मिक चिन्हों को ले कर गाइडलाइन बनाई थी. उस के अनुसार, स्टोर के कर्मचारियों को तिलक, कलावा, जनेऊ, तुलसी की माला और बिंदी पहनने से मना किया गया था. वहीं दूसरी तरफ हिजाब, पगड़ी और दाढ़ी की अनुमति दी गई थी. इस मसले को धार्मिक चश्मे से देखा जाने लगा. हिंदूवादी संगठनों ने लैंसकार्ट के स्टोर में जा कर प्रदर्शन किया. सोशल मीडिया पर ‘बायकौट लैंसकार्ट’ मुहिम शुरू हो गई.

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भारतीय किसान यूनियन के नेता विनीत सिंह ने लैंसकार्ट की इस दोहरी नीति की कड़ी अलोचना की. विनीत सिंह ने कहा, ‘भारत के संविधान ने सभी नागरिकों को अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक आजादी दी है. किसी भी कंपनी को अपना नियमकानून बनाने का हक है, लेकिन यहां यह देखना जरूरी है कि इस में किसी तरह का भेदभाव न हो. एक धर्म के लिए किसी तरह का बंधन हो और एक लिए छूट, तो यह अनुच्छेद 14 यानी समानता के अधिकार का हनन है.’

सोशल मीडिया में चर्चा बढ़ने व बौयकाट अभियान चलने के बाद लैंसकार्ट अपना पल्ला झाड़ने और बच निकलने का रास्ता देखने खोजने लगी. कंपनी ने अपने कर्मचारियों के लिए जारी की गई ‘स्टाइल गाइड’ में हिंदू धार्मिक प्रतीकों पर लगाई गई रोक को अवैध घोषित कर दिया. कंपनी के सीईओ पियूष बंसल ने कहा, ‘सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पौलिसी को पुराना बताया और कहा कि यह वर्तमान की नीति नहीं है. यह ड्रैस कोड पौलिसी पुरानी है. नए कौर्पोरेट युग में इस की जरूरत नहीं है.’

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
USD99USD49
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
 

डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
USD150USD129
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
  • 24 प्रिंट मैगजीन
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...