Thumb Story: उंगलियों की दुनिया में भी राजनीति कम दिलचस्प नहीं है. तर्जनी खुद को क्रांतिकारी मानती है, मध्यमा बदनाम है और अनामिका बेवजह दिल से जुड़ी अफवाहों का बोझ ढो रही है. मगर असली पावर सैंटर तो अंगूठा ही है-चाहे वोट डालना हो या मशीन अनलौक करनी हो. इस देश में अकसर दिमाग नहीं, अंगूठा ही काम करता है.

चौरासी लाख योनियों में मानव का जीवन प्राप्त करना अपनेआप में बड़ी उपलब्धि है. ईश्वर ने सोचसोच कर हमारे अंदर एकएक पार्ट फिट किए हैं तो भाई, इस शरीर का गुमान होना तो स्वाभाविक है. उदाहरण के लिए जैसे हमारे शरीर में 2 हाथ और 2 पैर होते हैं जिन में कुल मिला कर 20 उंगलियां होती हैं. हर एक उंगली का अपना महत्त्व है. पैर की उंगलियों को छोड़ दें, हाथ की उंगलियों की बात करें तो सब से ज्यादा महत्त्व अंगूठे का रहा है. हमारी अम्मा कहती थी, हमारे अगूंठे में अमृत होता है. हम ने इस बात को थोड़ा ज्यादा ही सीरियसली ले लिया था और बचपन में अंगूठे को इतना चूसा कि अम्मा को हार कर हमारे हाथों में कपड़े का दस्ताना पहनाना पड़ा. बेचारा हमारा अंगूठा शहीद होने से बचा था.

अंगूठे का जिक्र तो पौराणिक काल से होता चला आ रहा है. महाभारत काल में तो अंगूठे के कारण गुरु पर पक्षपात का आरोप भी लग गया था. दरअसल, गुरुजी को महसूस हुआ कि वह व्यक्ति तो बिना उन्हें फीस दिए उन से शिक्षा प्राप्त कर रहा है, और तो और, उन के प्रिय शिष्य से ज्यादा योग्य व प्रभावशाली है. राजा का बेटा राजा होने की तो परंपरा रही है पर योग्य का बच्चा भी योग्य हो, यह जरूरी तो नहीं.

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