Hindi Satire Story : पत्रकारिता के पेशे में हर दिन कुछ न कुछ नया देखने को मिलता है. यह एक ऐसा पेशा है, जिसमें आप कभी भी बोर नहीं हो सकते हैं. नये-नये लोगों से मिलना, नयी-नयी कहानियों से दो-चार होना, हर सुबह यह सोच कर घर से निकलना कि देखें आज कौन टकराता है. सरकारी नौकरी या किसी भी अन्य काम में इतना एक्साइटमेंट नहीं हो सकता, जितना पत्रकारिता में है. इसी वजह से मुझे अपना पेशा बहुत पसंद है और इसको छोड़ कर कुछ अन्य काम शुरू करने की बात कभी मेरे जहन में नहीं आयी.
मैंने कई शहरों में काम किया है. गांव, कस्बों, दलित बस्तियों के लोगों से मेरा जुड़ाव शुरू से बना रहा है. दिल्ली आने के बाद भी मैं अक्सर रिपोर्टिंग के दौरान गरीब बस्तियों में जाती थी और वहां की समस्याओं और कहानियों से रूबरू होती रहती थी. एक बार की बात है सपेरा जाति के विषय में मैं एक लेख तैयार कर रही थी. दिल्ली में पहले जंगल काफी थे, मगर अब काफी कम हो गये हैं. जंगल होने की वजह से यहां सपेरा जाति के काफी लोग रहते हैं. हालांकि अब ये लोग दिल्ली की सीमाओं पर छोटे-छोटे समूहों में बस्तियां बना कर रहते हैं. दिल्ली के सीमावर्ती जगहों जैसे रंगपुरी पहाड़ी, मांडी भाटी और शांति कैम्प में तम्बुओं और कच्ची झुग्गियों में गुजारा कर रहे इन लोगों के पास जीविका के साधन नाममात्र के हैं. जबसे देश में सांप पकड़ने, बंदर, भालू वगैरह पकड़ने और नचाने पर प्रतिबंध लगा है, तब से यह लोग भुखमरी का सामना कर रहे हैं. इनकी औरतें वेश्यावृत्ति के पेशे को अपनाने के लिए मजबूर हैं और आदमी मजदूरी वगैरह करके बच्चों का पेट पालते हैं.
सपेरा जाति की औरतों के बीच उठते-बैठते मुझे उनकी कई कहानियां पता चलीं. कुछ महिलाओं से मेरी अच्छी दोस्ती भी हो गयी. उसके बाद मैं अक्सर उनके बीच जाकर उनकी समस्याओं के बारे में पत्रिका में लिखने लगी.
एक दिन मुझे वहां एक परिवार से न्योता मिला. उनके बेटे की शादी दूसरे परिवार की बेटी से तय हुई थी. मुझे भी दावत में बुलाया गया था. दिन की शादी थी. मैं नियत समय पर पहुंच गयी. वहां शादी की रस्में बड़ी रोचक थीं. वहां तमाम औरतें ढोलक पर अपनी भाषा में गा-बजा रही थीं. दो घंटे में पूरी शादी निपट गयी और एक टैंट से दुल्हन विदा होकर अपने दूल्हे के साथ दूसरे टैंट की ओर पैदल ही चलने को हुई. तभी मैंने देखा कि दुल्हन के पिता ने दूल्हे के हाथों में एक बड़ा सा पिटारा लाकर रखा. मैं चौंक पड़ी. मुझे लगा कि शायद इसमें दूल्हे के लिए कपड़े और पैसा वगैरह होगा. पिटारा देखकर वर पक्ष खुशी से चीखने-चिल्लाने लगा. खूब शोर उठने लगा. मैं भी बड़ी उत्साहित हुई और यह देखने के लिए कि ससुर जी ने दामाद को क्या गिफ्ट दिया है, मैं सबसे आगे जाकर खड़ी हो गयी. दूल्हे ने अपने परिजनों के सामने वह पिटारा खोला. अन्दर से फुंफकारते हुए दो काले नाग अपना फन उठा कर खड़े हो गये. मैं बिदक कर दो कदम पीछे हो गयी. इतने खतरनाक और जहरीले नाग! मैंने साथ खड़े आदमी से पूछा, ‘ये सांप कहां से आये? सरकार ने तो सांप पकड़ने पर प्रतिबंध लगा रखा है?’
वह बोला, ‘सरकार सांप पकड़ने और नचाने पर रोक लगा सकती है, हमारे रिवाजों पर तो नहीं लगा सकती. सपेरा जाति में शादी तब तक पूरी नहीं होती, जब तक दुल्हन का पिता दूल्हे को जहरीले सांप की जोड़ी की पिटारी न दे. इन दोनों की शादी भी पिछले पांच साल से अटकी हुई थी कि काले नाग की जोड़ी न मिल रही थी. देखिए कितने सुंदर नाग मिले हैं दूल्हे को.’
दूल्हा खुशी-खुशी पिटारे को सिर पर रख कर आगे चल दिया और उसकी दुल्हन उसके पीछे-पीछे. सब खुश थे. नाग की जोड़ी देखकर वर की तरफ के लोग काफी प्रफुल्लित थे, तो वधु के माता पिता के चेहरे पर भी बेटी को ब्याह कर और दामाद को उसकी सौगात देकर भरपूर खुशी झलक रही थी. मगर मैं इस सोच में डूबी थी कि जब सांप नचाने पर प्रतिबंध है तो फिर नागों की इस जोड़ी का यह दूल्हा करेगा क्या? Hindi Satire Story :





