Social Media Regulation India: कल पढ़ा कि आयकर विभाग लोगों के सोशल मीडिया पर नजर रखेगा, कर चोरी का पता लगाएगा. मैं यह विचार सुन कर ही बौरा गया हूं. मेरे सोशल मीडिया प्रोफाइल को कुछ प्यारे दोस्तों, पड़ोसियों, रिश्तेदारों और चंद जलकुकड़ों के सिवा आज तक किसी ने देखा नहीं था. आगे से खुद सरकार देखेगी. कितना मजा आएगा जब आयकर भवन के रहस्यमयी गलियारों में रिटर्न के बजाय मेरी रील्स देखी जाएंगी. उन का असेसमैंट किया जाएगा. आज तक मु?ा पर किसी ने नजर डाली ही नहीं, आखिर सरकार ने मुझे आम आदमी का दर्द समझ. उस का धन्यवाद तो बनता है.

मन झम कर गा रहा है, अब जा कर आया मेरे बेचैन दिल को करार. मेरी बनाई रील्स का स्तर कितना ऊंचा हो गया है. इन्हें फुरसत में बैठे टाइमपासुओं के बजाय साहब लोग देखेंगे, जिन्होंने दिनरात मेहनत कर के यूपीएससी की परीक्षा पास की है.

वैसे, सही मायने में साहब लोगों के साथ सामाजिक न्याय अब हुआ है. इतनी मेहनत के बाद धूलभरी फाइल्स देखने से कितना अच्छा होगा सोशल मीडिया प्रोफाइल्स देखना.

वैसे, अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि आयकर वाले किस प्लेटफौर्म को देखेंगे?

क्योंकि इस का डिटेल प्रोसिजर नोटिफिकेशन आया नहीं है. हो सकता है, अलगअलग प्लेटफौर्म्स के लिए कुछ उपविभाग बना दिए जाएं. बताते हैं एआई यानी आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस का उपयोग किया जाएगा. मैं तो कह रहा हूं जब आप ने इतने काबिल अफसर यानी एक्चुअल इंटैलिजैंस कुरसी पर बैठाया है, तो आर्टिफिशियल काम क्यों करना?

कितना मनोरम दृश्य होगा जब रिटर्न्स के मनहूस, बेमजा आंकड़ों की भीड़ में एक बाला की रील, ‘तेनु काला चश्मा लगदा है’, देख कर साहब चश्मा उतार कर स्क्रीन के पास ?ाकते हुए क्लर्क से बोलेंगे, ‘हम्म, ये चश्मे का खर्च तो डिक्लेयर नहीं किया इस ने. इंपोर्टेड है.  पता करो कितने डौलर का है. कस्टम ड्यूटी दी या नहीं. इस ने कान में हीरे के टौप्स पहने हुए हैं. इस की इनकम  से आए हैं या कैश में लिए हैं. नोटिस देना तो बनता है. 4-5 दिन चक्कर लगवाएंगे तो औफिस की साख बढ़ेगी.

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