महत्त्वाकांक्षी उमा ने खूब सपने संजोए थे अपने भावी पति के बारे में. जल्द ही उस का सपना पूरा भी हो गया. सिला खत्म कर उमा घर से निकली तो मैं दरवाजा बंद कर अंदर आ गई. आंखों में अतीत और वर्तमान दोनों आकार लेने लगे. मैं सोफे पर चुपचाप बैठ कर अपने ही खयालों में खोई अपनी सहेली के रीते हाथों के बारे में सोचती रही.

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