घर के कामों से सरला को फुरसत कहां थी. ऐसे में यमदूतों का उसे ले जाने के लिए जाना, भला सरला के लिए सब काम छोड़ कर उन के साथ जाना कैसे संभव हो पाता?

सरला को कहां पता था कि आज उस के जीवन का यह आखिरी दिन है. पता होता तो क्या वह अचार के  दोनों बड़े मर्तबान भला धूप में न रख देती और छुटकी के स्वेटर का तो केवल गला ही बाकी बचा था, उसे न पूरा कर लेती. खैर, यह सब तो तब होता जब सरला को पता होता कि उसे बस, आज और अभी चल देना है.

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