रविवार की शाम रैस्तरां में बैठा चाय की चुस्कियों के बीच देश की समस्याओं के बारे में एक आम आदमी की तरह चिंतन कर परेशान हो रहा था. अचानक ही मेरा एक प्रशासनिक अधिकारी मित्र पंकज आ गया. थोड़ी देर दीनदुनिया की बातें होने के बाद मैं ने पूछा, ‘‘यार, आजकल बहुत व्यस्त रहते हो, इतने बड़े पद पर ऐसे क्याक्या कार्य करने होते हैं?’’

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