धूप का टुकड़ा बरामदे में प्रवेश कर चुका था. सूरज की कोमल किरणों के स्पर्श का अनुभव करते हुए रविवार की सुबह, अखबार पढ़ने के लोभ से मैं कुरसी पर पसर गई. अभी मैं ने अखबार खोला ही था कि दरवाजे की घंटी बज उठी.

दरवाजे पर मौसीजी को देख कर मैं ने लपक कर दरवाजा खोला.

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