Sorrowful Narrative : अपने बच्चे का दुख मातापिता को तोड़ कर रख देता है. स्पैशल चाइल्ड था सनी लेकिन दिल का टुकड़ा था उन का, और दिल को कोई अपने शरीर से अलग तो नहीं कर सकता न.

रविवार का दिन था. दोपहर के खाने के बाद मैं लौन में बैठा जाड़े की गुनगुनी धूप का मजा ले रहा था. तभी सनी दौड़ता हुआ आया और मेरे कान के पास जोर से चिल्ला कर ताली बजाते हुए बोला, ‘‘पापा को डरा दिया.’’

मैं ने प्यार से उसे अपनी गोद में खींच लिया और उस के होंठों से बहते थूक को अपने रूमाल से पोंछने लगा. तभी मेरी नजर उस के हाथों की ट्रौफी पर गई, मैं ने पूछा, ‘‘क्यों रे बदमाश, यह कहां से ले आया?’’

सनी मेरी गोदी से उतर गया और ट्रौफी को कस कर अपनी छाती से चिपकाते हुए गुस्से से बोला, ‘‘सनी की है और सनी किस्सी को नाइ देगा.’’ और वह वहां से भाग गया.

मैं दोबारा कुरसी पर ऊंघने लगा लेकिन तभी सनी के रोने की आवाज आई तो मैं लपक कर अंदर गया. वहां देखा कि हमारे पड़ोसी गुप्ताजी का बेटा रौनक सनी के हाथों से ट्रौफी छीनने की कोशिश कर रहा है. सनी पूरा जोर लगा कर उसे अपनी छाती से चिपकाए हुए है. मुझे देखा तो दौड़ कर मेरे पास आ कर मेरे पीछे दुबक कर खड़ा हो गया.

रौनक गुस्से से बोला, ‘‘अंकल, सनी मेरी ट्रौफी मेरे घर से उठा लाया है और अब दे नहीं रहा, ऊपर से झठ बोल रहा है कि ट्रौफी उस की है.’’

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