Family Story in Hindi : सुमन को अपनी सास की फैशनपरस्ती को ले कर उलटीसीधी बात सुनना नागवार गुजरता. उम्र तो एक संख्या भर है. ऐसा सुमन का मानना था. अपनी इसी सोच के चलते अपनी सास निर्मलाजी के खिलाफ बोलने वालों को मुंहतोड़ जवाब देने में भला पीछे क्यों रहती.

‘‘कैसी है तुम्हारी लिपस्टिक वाली सास?’’ नरेश सक्सेना सर ने उस से मीटिंग समाप्त होने के बाद चाय पीते हुए पूछा तो वह बिदक गई. अभी वह कुछ बोलती कि सरला ने उसे टीचर्स एसोसिएशन की ओर से बधाई देते हुए कहा, ‘‘अरे, वे सुमन की रोलमौडल हैं. खुद राजनीति में हैं तो बहू क्यों पीछे रहे. है कि नहीं? वे तो चाहेंगी ही कि बहू भी राजनीति में मन लगाए.’’

‘‘आप लोग छूटते ही टीकाटिप्पणी क्यों करने लगते हैं?’’ वह नरेश सक्सेना सर को घूरते हुए देख कर बोली, ‘‘यदि कोई आप के अभिभावकों के बारे में ऐसी ही सतही बात करे तो कैसा लगेगा. रही बात उन की, उन की व्यक्तिगत रुचियों और रहनसहन पर ऐसी हलकी बात करने का कोई हक नहीं है. वे चाहे जैसे रहें, वे मेरी मां समान अभिभावक हैं. यही क्या कम है कि वे मेरी स्वतंत्रता पर कोई बंदिश नहीं लगातीं.

‘‘और रही बात मेरी राजनीति में आने की तो मेरी ऐसी कोई मंशा नहीं है. शुरू से ही छात्र राजनीति से जुड़ी रही कि इसी बहाने हम अपने हक की बात कर सकें. यहां टीचर्स एसोसिएशन में भी इसलिए रुचि रखती हूं कि अपने समूह के हितों की रक्षा कर सकूं. आप से भी तो उपाध्यक्ष पद पर खड़े होने को कहा गया था. मगर आप पीछे क्यों हट गईं?’’

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