Satirical Story In Hindi : आप ही बताएं इन आवारा कुत्तों का क्या किया जाए जो बिना पासपोर्ट, बिना वीजा और बिना विचारधारा के खुलेआम सड़कों पर लोकतंत्र का आनंद लेते फिरते हैं? इन्हें न देश का फर्क दिखता है, न विदेशी मेहमान का-बस मौका मिला और दांतों की ‘लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति’ हो गई.
समाज में आदमी द्वारा आदमी को काटने की घटनाएं तो समयसमय पर होती रहती हैं और कुसूरवार को उस के हिसाब से सजा भी मिलती है लेकिन उन आवारा कुत्तों का क्या किया जाए जो खुलेआम घूमते हुए लपक कर किसी को भी काट खाते हैं. ये कूकुर यह भी नहीं देखते कि बंदा देश का है या विदेश का?
अब किसी कुत्ते को कोई कैसे समझाए कि रंगरूप को देख कर इतना तो समझा लो कि यह विदेशी आदमी है. इसे काटने से देश की इज्जत को झाटका लगेगा, लेकिन कुत्ते तो कुत्ते होते हैं. देशी को भी काट देते हैं, विदेशी को भी काट देते हैं.
जैसे देश के कुछ गुंडेबदमाश देश के लोगों को भी लूटते हैं और विदेश से आए हुए पर्यटकों को भी लूट लेते हैं. महिला हुई तो उस के साथ रेप भी कर देते हैं. वैसे ही कुत्ते धर्मजाति में फर्क न कर अपना ‘काटन कर्म’ करते हैं. वे सभी धर्म के लोगों को समान रूप से देखते हैं और जब भी उन का मूड होता है, किसी को भी काट खाते हैं.
देश का ऐसा कोई शहर नहीं होगा जहां आवारा कुत्तों की कुकुरगीरी न चलती हो. गुंडों की तरह लोगों के पीछे पड़ जाते हैं. ये लोग जान बचाने के लिए दाएंबाएं होते हैं.
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