The Choshu Five : चोशू 5 वे युवा थे जो 1863 में जापान से निकले और 1868 में लौटे. पुरानी व्यवस्था को गिराया और 1890 तक जापान को एक आधुनिक राष्ट्र में बदल दिया. आज के जापान के रेलवे, शिक्षा, तकनीक, नौसेना, उद्योग और लोकतंत्र के नायक यही 5 नौजवान थे. इन पांचों के बिना जापान भी 19वीं सदी में भारत या चीन की तरह यूरोप का गुलाम बन जाता. जापान ने तय किया कि या तो आधुनिक बनो या गुलाम बन जाओ. सिर्फ 30-40 साल में जापान ने नौसेना, उद्योग, शिक्षा, रेलवे, बैंकिंग सबकुछ पश्चिमी मौडल पर खड़ा कर लिया. यह दुनिया के इतिहास की सब से तेज मौडर्नाइजेशन की प्रक्रिया थी. आखिर, सिर्फ 3 दशकों में कैसे बदला जापान, आइए जानते हैं.

आज अमेरिका और यूरोप में भारतीयों की स्थिति बेहतर नहीं है. डोनाल्ड ट्रंप की नीयत और उन की नीतियां इमिग्रैंट्स के खिलाफ हैं. इस के चलते भारतीयों के लिए अमेरिका ख्वाब बनता जा रहा है. भारतीयों के लिए यूरोप में भी स्थिति पहले जैसी नहीं रह गई. दशकों से मिडिलईस्ट में चल रही अराजकता के कारण यूरोप पहले से ही शरणार्थी संकट से जूझ रहा है, ऐसे में यूरोप के कई देशों ने इमिग्रेशन पौलिसी में बदलाव किए हैं जिस से सब से ज्यादा नुकसान भारतीयों को हो रहा है लेकिन सवाल यह है कि भारतीयों की भारत से भागने की होड़ क्यों है? सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा कहने वाले लोग ही हिंदुस्तान से भागने को तत्पर क्यों नजर आ रहे हैं?

जापान के इतिहास की एक बेहद महत्त्वपूर्ण घटना है जिसे ‘चोशू फाइव’ के नाम से जाना जाता है. बात 1863 की है जब 5 जापानी नौजवान इतो हिरोबुमी, इनौए काओरू, यामाओ योजो, नोमुरा याकिची और एंडो किनसुके कोयले से लदे जहाज में छिप कर जापान से ब्रिटेन चले गए थे. उस दौर में इस तरह जापान से बाहर भागना किसी भी जापानी के लिए अपराध था. पकड़े जाते तो देशद्रोह के जुर्म में फांसी हो जाती. ये पांचों जापान के पहले ऐसे नौजवान थे जिन्होंने यूनिवर्सिटी कालेज, लंदन में दाखिला लिया और वहां से इंजीनियरिंग, राजनीति, अर्थशास्त्र, तकनीक और विज्ञान की शिक्षा हासिल की.

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