राजकोट में 3 दिन से पहले ही वेस्टइंडीज को मिली करारी हार से सवाल उठने लगा है कि क्या टेस्ट मैच अपना औचित्य खोने लगे हैं या फिर खिलाड़ी ही अब इस से ऊबने लगे हैं? यह ठीक है कि घरेलू टीम को अपने मैदानों पर खेलने का फायदा मिलता है पर जिस तरह से मेहमान टीम ने अपनी नाक कटाई है वह बात हजम नहीं हो रही है.

मैच के दूसरे दिन ही डगमगा गई वेस्टइंडीज की टीम ने तीसरे दिन भी कोई चमत्कार नहीं किया. उस ने पहली पारी में 48 ओवरों में महज 181 रन ही बनाए. फॉलोऑन देने के बाद भारत ने उसे दोबारा बैटिंग करने के लिए बुलाया. लेकिन दूसरी पारी में भी नतीजा ढाक के तीन पात रहा.

वेस्टइंडीज के सभी खिलाड़ी मानो अपने विकेट फेंकते चले गए. 50.5 ओवर में उन्होंने 196 रन ही जोड़े. इस तरह भारत ने एक पारी और 272 रनों से वेस्टइंडीज को हरा दिया.

वेस्टइंडीज की दूसरी पारी में भारत के स्पिन गेंदबाज कुलदीप यादव ने 14 ओवरों में 57 रन दे कर 5 विकेट लिए. आर. आश्विन ने 2 तो रविंद्र जडेजा ने 3 विकेट चटकाए.

वेस्टइंडीज की तरफ से ओपनर बल्लेबाज पॉवेल ने सब से ज्यादा 83 रन बनाए. बाकी बल्लेबाज कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाए. पहली पारी में 53 रन बनाने वाले आरएल चेस ने दूसरी पारी में निराश किया.

मैच जीतने के बाद भारत के कप्तान विराट कोहली ने अपना पहला मैच खेल रहे पृथ्वी शॉ के साथ साथ रविंद्र जडेजा की भी तारीफ की. वे बोले, “मैं खुश हूं कि हम ने शानदार खेल खेला. जिस तरह से पृथ्वी ने अपने डेब्यू मैच में शानदार शतक जमाया उसे देख कर अच्छा लगा. जड्डू भी बहुत अच्छा खेला. उन्होंने हमारे लिए कीमती रन बनाए.”

पृथ्वी शॉ को इस मैच में उम्दा खेल दिखाने के लिए मैन ऑफ द मैच का खिताब दिया गया.

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