जिस विषय पर मैं ये लेख लिख रहा हूं, ये समझ लीजिये कि ये मसला आम आदमी के लिए उतना ही जरुरी है जितना की एक पौधे के लिए पानी. यानी अगर पौधे को पानी नहीं दिया गया तो धीमें-धीमें कर के सूख जाएगा. हिंदुस्तान की आवाम की हालत भी कुछ ऐसी ही हो रही है. जिसको हम अभी भांप नहीं पा रहे हैं. याद कीजिए 24 अगस्त 2017 का दिन. जब सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सरकार से कहा था कि निजता का अधिकार भले ही संविधान में लिखे मौलिक अधिकारों में न हो लेकिन हर मौलिक अधिकार से इसकी खुश्बू आती है. लेकिन क्या ये संभव हो पाया. नहीं हो पाया. हम गाहे-बगाहे अपनी सारी गोपनीय सूचना सार्वजनिक करते जा रहे है. अगर हम नहीं भी कर रहे तो ये कई कंपनी इस काम पर जुटी हुई हैं. हम अमेरिका चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप के लिए डाटा चोरी करने वारे कांड का जिक्र नहीं करेंगे लेकिन ताजा मामला तो और भी हैरान कर देने वाला है.

हाल ही में एक मीडिया जर्नलिस्ट के डाटा से छेड़छाड़ की गई. उसके स्मार्टफोन पर Pegasus Spyware अटैक हुआ. नतीजन एक खुफिया साइबर कंपनी को उसके फोन का रिमोट एक्सेस मिल गया और इसके बाद शुरू हुई उसकी जासूसी. जब तक जर्नलिस्ट को इस बात की जानकारी मिली उसकी निजी जानकारी साइबर कंपनी के हाथ लग चुकी थी.साइबर कंपनी के हत्थे चढ़ने वाला ये शख्स अकेला नहीं था. व्हाट्सअप के दावे के मुताबिक इस साइबर कंपनी ने कुल 1400 लोगों को टारगेट किया. फेसबुक के स्वामित्व वाले WhatsApp ने गुरुवार को पुष्टि की कि इजरायल की साइबर खुफिया कंपनी NSO ग्रुप की ओर से Pegasus नाम के spyware का इस्‍तेमाल कर भारतीय मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकारों को टारगेट कर उनकी जासूसी की गई. WhatsApp ने इस सप्ताह इजरायल की साइबर खुफिया कंपनी NSO ग्रुप पर मुकदमा दायर किया है. सोशल मीडिया प्लेटफौर्म ने आरोप लगाया है कि इसने वैश्विक स्तर पर 1,400 सलेक्टेड यूजर्स की जासूसी की है.

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