जिस विषय पर मैं ये लेख लिख रहा हूं, ये समझ लीजिये कि ये मसला आम आदमी के लिए उतना ही जरुरी है जितना की एक पौधे के लिए पानी. यानी अगर पौधे को पानी नहीं दिया गया तो धीमें-धीमें कर के सूख जाएगा. हिंदुस्तान की आवाम की हालत भी कुछ ऐसी ही हो रही है. जिसको हम अभी भांप नहीं पा रहे हैं. याद कीजिए 24 अगस्त 2017 का दिन. जब सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सरकार से कहा था कि निजता का अधिकार भले ही संविधान में लिखे मौलिक अधिकारों में न हो लेकिन हर मौलिक अधिकार से इसकी खुश्बू आती है. लेकिन क्या ये संभव हो पाया. नहीं हो पाया. हम गाहे-बगाहे अपनी सारी गोपनीय सूचना सार्वजनिक करते जा रहे है. अगर हम नहीं भी कर रहे तो ये कई कंपनी इस काम पर जुटी हुई हैं. हम अमेरिका चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप के लिए डाटा चोरी करने वारे कांड का जिक्र नहीं करेंगे लेकिन ताजा मामला तो और भी हैरान कर देने वाला है.

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