नास्तिकता की ओर बढ़ रही है दुनिया

मैं नास्तिक क्यों हूं…

काल्पनिक ईश्वर में विश्वास नहीं करता बौद्ध धर्म

तमिलनाडु में वेल्लोर के तिरूपत्तूर की निवासी 35 साल की एक वकील एम.ए.स्नेहा ने अपने धर्म के साथ जाति का भी जिक्र कभी नहीं किया. उनके जन्म और स्कूल के सर्टिफिकेट्स में भी जाति और धर्म के कौलम खाली हैं. स्नेहा को हाल ही में तमिलनाडु सरकार ने एक सर्टिफिकेट जारी किया है, जो कहता है कि इनकी कोई जाति या धर्म नहीं है. इन्हें भारत का पहला ऐसा नागरिक माना जा सकता है, जिन्हें अधिकारिक तौर पर अनुमति मिली है. यह सर्टिफिकेट पाने के लिए स्नेहा को नौ साल लम्बी लड़ाई लड़नी पड़ी है. उन्होंने वर्ष 2010 में ‘नो कास्ट, नो रिलिजन’ के लिए आवेदन किया था और 5 फरवरी 2019 को कई मुश्किलें पार करने के बाद उन्हें यह सर्टिफिकेट मिला है. अब स्नेहा पहली ऐसी शख्स हैं जिनके पास यह प्रमाणपत्र है. स्नेहा खुद ही नहीं, बल्कि उनके माता-पिता भी बचपन से ही अपने आवेदन पत्रों में जाति और धर्म का कौलम खाली छोड़ते थे. स्नेहा खुद ही नहीं, बल्कि अपनी तीन बेटियों के फौर्म में भी जाति और धर्म के कौखाली छोड़ती हैं.

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