कोरोना के वक़्त ने बहुत से अकेले लोगों को और भी ज़्यादा अकेला कर दिया है. शाइस्ता बेगम उनसठ बरस की हैं. पति को गुज़रे बीस साल हो गए. एक बेटा है जो जॉर्डन जा कर बस गया है. उसकी अपनी गृहस्थी है. अपने बाल-बच्चे हैं. इंडिया आना बहुत कम होता है. दो बेटियां हैं जो इसी शहर में ब्याही हैं. वे कभी कभी माँ से मिलने अपने बच्चो और पति के साथ आती थीं, मगर जब से कोरोना का खौफ फैला है बस फ़ोन पर ही हाल चाल ले लेती हैं.

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