Intelligent : छोटा बच्चा कहानियों में भरोसा नहीं करता. आप उसे खिलौना देने की जगह क्या यह कह कर खुश कर सकते हैं कि वह सोच ले कि उस के पास एक बड़ी सी गुड़िया है या चौकोर क्यूब है या रेल का इंजन है.

अफसोस यह कि मानव एकदम काल्पनिक कहानियों में अगाध विश्वास रखता है और बच्चों तक से भौतिक व काल्पनिक चीजों में भेद करने की शक्ति छीन लेता है. बच्चा रो कर खाना मांगता है जबकि वयस्क पूजा कर के खाने की तमन्ना करता है. बच्चा मां की गोद में सुरक्षित महसूस करता है जबकि वयस्क एक भगवान को गोद में रख कर खुद को सुरक्षित महसूस करने की झूठी आदत डाल लेता है.

बच्चों का विकास ठोस धरातल पर होता है. वे छू कर, सूंघ कर, देख कर, सुन कर विश्वास करते हैं. वयस्क जिसे छू नहीं सकते, जिसे सुन नहीं सकते, जिसे सूंघ नहीं सकते, जिसे देख भी नहीं सकते उस पर विश्वास ही नहीं करते बल्कि साजिशन पैदा किए गए उस विश्वास के लिए झगड़ने, छीनने और मरनेमारने तक के लिए तैयार हो जाते हैं.
समझदार कौन है, वयस्क या बच्चा?

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