Indira-Menaka Gandhi Case : अलग धर्मों में शादी से हुए बच्चों का धर्म क्या है ? जानिए इंदिरा गांधी और मेनका गांधी के मुकदमे से.
आजादी के बाद से ही किसी व्यक्ति का धर्म तय करने का अधिकार दरअसल अदालतों को मिले हुए हैं जिस पर धर्म के ठेकेदारों, पंडों, पादरियों और मौलवियों का तिलमिलाना स्वाभाविक बात है. पितृसत्तात्मक व्यवस्था यह मानती है कि पति का धर्म ही पत्नी का धर्म होगा और संतान का धर्म वही होगा जो पिता का है लेकिन उत्तराधिकार और विशेष विवाह के कानून कुछ और कहते हैं.

एक मुहिम अब से कोई 20 साल पहले आकार लेना शुरू हो गई थी लेकिन अंजाम पर पहुंची  थी 2014 में जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा अप्रत्याशित बहुमत से सत्ता में आई थी. तब सोशल मीडिया पर तरहतरह की पोस्ट इस आशय की वायरल होना रोज की बात थी कि राहुल गांधी का धर्म क्या है क्योंकि उन की मां सोनिया गांधी ईसाई हैं और पिता राजीव गांधी पारसी इस लिहाज से थे कि उन के पिता फिरोज गांधी पारसी थे.

कट्टर सवर्णों को यह कहते सुना जा सकता था कि पहले हमें मुगलों ने लूटा, फिर अंगरेजों ने लूटा और आजादी के बाद से नेहरूगांधी खानदान सनातन धर्म को भी नष्टभ्रष्ट कर रहा है क्योंकि वे हिंदू हैं ही नहीं.

कट्टर हिंदू धार्मिक भावनाओं को भड़का कर भाजपा ने सत्ता तो हासिल कर ली और अपने एजेंडे व हिंदुओं से किए वादे के तहत उस ने राम मंदिर बनवाया, जम्मूकश्मीर से धारा 370 को बदला, तीन तलाक वाले कानून को खत्म कर दिया और भी ऐसे काम बाद में उस ने किए हैं जैसे तीर्थयात्राएं बढ़वाना, दान का काम कराना, घाट बनवाना, मौब लिंचिंग पर पुलिस का चुप रहना वगैरह जो उन 8-10 करोड़ सवर्णों का दिल खुश कर देने वाले थे. इन्हीं लोगों ने एवज में नोटबंदी और जीएसटी की कड़वी खुराक हलक में उड़ेल ली थी. इस दौरान छिटपुट सोशल मीडिया पर राहुल गांधी के धर्म के बारे में बासी पोस्टें आतीजाती रहती हैं जिन का मकसद नए सवर्ण वोटरों और पिछड़ों से ऊंचे वर्गों को बरगलाना रहता है.

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