Press Freedom: भारतीय मीडिया विश्व प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2026 में 180 देशों में 157वें स्थान पर पहुंच गया है. पिछले साल तक 151वीं रैंकिंग पर था. एक साल में छह पायदान की गिरावट मामूली लगती है लेकिन आरएस एफ यानी रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स के अनुसार भारत का स्कोर सिर्फ 31 रह गया है जो की कई अफ़्रीकी देशों से भी कम है. प्रेस फ़्रीडम के मामले में पड़ोसी पाकिस्तान 153, बांग्लादेश 152 और नेपाल 87वें स्थान पर हैं.

बात सिर्फ रैकिंग में गिरावट की नहीं है बल्कि यह इस पेशे में इंसानियत और पत्रकारिता के पतन का प्रतीक भी है. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में सत्ता के साथ मिलकर मीडिया ने स्वतंत्र आवाजों को कुचल दिया है. आरएसएफ की रिपोर्ट यह भी कहती है कि मोदी सरकार में आजाद पत्रकारों पर हमले, हरासमेंट और राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों का दुरूपयोग चरम पर है.

मेनस्ट्रीम मीडिया का असली चेहरा 20 जुलाई की घटना में पूरी तरह उजागर हो गया. संसद मार्च के दौरान पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ की घटनाओं को खूब दिखाया गया जबकि प्रोटेस्ट करने वालों पर आंसू गैस, लाठीचार्ज और बर्बरता की तस्वीरों को किसी चैनल ने जगह नहीं दी. प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी लिंक और चाइनी एजेंट होने के आरोप लगाकर एक पूरा नैरेटिव गढ़ा गया.

बीबीसी और अल जजीरा जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने पुलिस कार्रवाई और छात्रों की मांगों पर फोकस किया लेकिन घरेलू चैनलों ने घटना को देश विरोधी साजिश का रंग दे दिया. CJP प्रदर्शन में मुख्यधारा के चैनलों ने एकतरफा रिपोर्टिंग की जिसमें तोड़फोड़ को हाइलाइट कर पूरे आंदोलन को हिंसक बताने की कोशिश की गई जबकि जमीनी हकीकत बिलकुल उलट थी. Press Freedom

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