‘निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छवाय‘ वाली कहावत बताती है कि अपनी निंदा करने वाले को भी पूरा अधिकार देना चाहिए. आज के समय में सरकार निंदा करने वाले या अपना दर्द सुनाने वाले को अपने से कुछ ज्यादा ही दूर रखना चाहती है, जिस की वजह से धरना, प्रदर्शन और अपनी बात सुनाने की आड़ में अराजकता भी होने लगी है. जनता का दर्द सीधे सुनने के लिए कुरसी पर बैठे नेताओं को प्रयास करने चाहिए तभी देश में असल लोकतंत्र स्थापित हो सकेगा.

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