बलात्कार निसंदेह महिलाओं के प्रति एक घृणित अपराध है लेकिन आजकल ऐसे बलात्कारों की संख्या तेजी से बढ़ रही है जिन में सहमति से संबंध बनते हैं और अदालतें बिना वास्तविकता पर विचार किए आरोपी को जेल भेज देती हैं. यह कैसी ज्यादती है, इस पर पढि़ए यह खास रिपोर्ट.

बीती 5 सितंबर को बलात्कार के एक मामले में इंदौर हाईकोर्ट ने जो अजीबोगरीब फैसला सुनाया है वह हैरानी के साथ चिंता पैदा करने वाला भी इस लिहाज से है कि इसे न्याय कहा जाए या अन्याय माना जाए. बलात्कार की परिभाषा और बलात्कार की सजा को ही कठघरे में खड़ा करते इस और देशभर की अदालतों में चल रहे ऐसे लाखों मामलों को समझें तो लगता है कि इन में सिरे से बदलाव की जरूरत है और ऐसा कहने की पर्याप्त वजहें व आधार भी हैं.

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