तुम्हारे मान लेने से

पत्थर भगवान हो जाता है।

तुम्हारा भगवान पत्थर की गाय है

जिससे तुम खेल तो सकते हो ,

लेकिन दूध नहीं पा सकते ।

रमाशंकर यादव विद्रोही

विद्रोही जी की उक्त कविता इस कोरोना काल में सच साबित हो रहा है. जब लोगों के ऊपर किसी तरह का संकट और विपदा आता है तो लोग अपने इष्टदेवता मंदिर और मस्जिद का सहारा लेते हैं. लेकिन इस कोरोना के कहर में मंदिर,मस्जिद ,चर्च और गिरजाघर कुछ भी काम नहीं आया.यहाँ तक कि मंदिर में पड़े मूर्ति को भी लोगों ने मास्क तक पहनाया.उल्टी धारा बहने लगी.वे हमारे सुरक्षा के लिए थे.लेकिन उनकी सुरक्षा खुद हमें करनी पड़ रही है. दुनिया भर में सभी धर्मस्थलोन को बंद करना पड़ा.मंदिर,मस्जिद,गुरुद्वारा हो या चर्च.काबा हो काशी का मंदिर सभी बन्द पड़े हैं.

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