जिस सोशल मीडिया को प्रिंट मीडिया का पर्याय बताया जा रहा था, असल में वह अफवाहें फैलाने का माध्यम बन कर रह गया है. दरअसल, यह सोशल मीडिया नहीं, डिजिटल मीडिया है, जिस को सोशल साइट्स के जरिए फैलाया जाता है. डिजिटल मीडिया में ज्यादातर भ्रामक, तथ्यहीन और गालियों से भरे संदेशों का आदानप्रदान किया जाता है. जातीय द्वेषभावना से भरे संदेश सब से ज्यादा प्रचारित किए जाते हैं. यही वजह है कि अब समाज में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस पर नजर रखने के उपाय सोचे जा रहे हैं.

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