भले ही चंद्रयान-2 पूरी तरह सफल न रहा लेकिन इसरो के वैज्ञानिकों ने पूरी कोशिश की.मिशन चंद्रयान 2 का कुछ ही दूरी पर था विक्रम लैंडर जब इसरो के वैज्ञानिकों से उसका संपर्क टूट गया. इसरो के अध्यक्ष और सभी वैज्ञानिक बहुत हताश औऱ निराश हैं लेकिन इसरो पूरा भारत तुम्हारे साथ खड़ा है और आज नहीं तो कल कामयाबी जरूर मिलेगी.इसरो के अध्यक्ष के.सिवन ने जब घोषण कर बताया कि संपर्क टूट गया है तो वो काफी दुखी थें.उनके आंख में आंसू आ गया हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें अपने गले लगाते हुए सांत्वना भी दिया.

पूरा  देश काफी उत्साहित था. 978 करोड़ रुपये में मिशन चंद्रयान 2 चांद को छूने ही वाला था लेकिन तभी एक दुखद खबर आई कि विक्रम लैंडर योजना के अनुरुप ही चल रहा था लेकिन 2.1 किमी पहले ही उसका भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन से संपर्क टूट गया. जब इसरो ने इसकी आधिकारिक घोषणा की तो सभी देशवासियों की उम्मीदें टूट गई और सारे वैज्ञानिक भी परेशान हो गए प्रधानमंत्री ने वहां से जाने से पहले सबको शुभकामनाएं दी लेकिन इसरो के अध्यक्ष जब मोदी के गले लगे तो उनके आंखों में आंसू थे वो भावुक पल देखकर किसी को भी रोना आ जाएगा.

इस वक्त पूरा देश इसरो के वैज्ञानिकों के साथ खड़ा है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि एक दिन हम जरूर सफल होंगे.भारत की कोशिश बेकार नहीं जाएगी.इसरो पर आज पूरे देश को गर्व है. हालांकि पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है उसने भारत को ट्रोल करना शुरु कर दिया. पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रशीद ये कहते हैं कि उनके पास पाव भर के और आधे पाव के भी बम हैं. अब इस मंत्री की बात से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ये मंत्री कैसा है कुछ और कहने की जरूरत नहीं हैं और फिर भी पाक भारत को धमकी देता है और चंद्रयान के विफल होने पर भारत पर कटाक्ष करता है.पाकिस्तान के विज्ञान और तकनीकि मंत्री फवाद ने ट्वीट कर लिखा है कि “जो काम नहीं आता, पंगा नहीं लेते ना..डियर इंडिया” इस मंत्री के बड़बोले बोल से अबतक आप ये तो समझ ही गए होंगे ही पाकिस्तान हमेशा पाकिस्तान ही रहेगा. क्योंकि उसे दूसरे मुल्कों को ट्रोल करने के सिवा कुछ भी नहीं आता है अब भाई  पाक मंत्री फवाद की बातों से तो यही लगता है.लेकिन पाकिस्तान तुम देखना भारत इस कामयाबी को जरूर हांसिल करेगा.

अरे भारत तो वो देश है जिसने पाकिस्तान से बहुत बाद में 1969 में इंडियन स्पेस रिसर्च और्गेनाइजेशन (इसरो) बनाया और छह साल के अंदर ही 1975 में अपना पहला सेटेलाइट आर्यभट्ट अंतरिक्ष में भेजा था. हिंदुस्तान ने हमेशा वैज्ञानिकों का सम्मान किया है और हिंदुस्तान को पूरा भरोसा है कि भले ही इस बार संपर्क टूटा है लेकिन उम्मीद अभी बाकी है और एक दिन ये सफलता भारत को जरूर मिलेगी. हमें यकीन है इसरो ये कामयाबी जरूर हांसिल करेगा और ये साबित करेगा कि भारत किसी भी देश से कम नहीं है. भारत के अंदर हर काम को करने का हौसला है और भारत कभी भी पीछे नहीं हटेगा.

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