कोई भी पर्व अगर सार्वजनिक रूप से मनाया जा रहा है तो इस में देखा जाता है कि जो दानदाता जितना बड़ा होता है उसे उतना ही महत्त्व दिया जाता है. गणेश के दरबार में माथा नवाने वाले लोग ‘आस्था’ के कारण नहीं अपनी जेब की ताकत पर सम्मान पाते हैं.

Tags:
COMMENT