विश्वभर में शिक्षा पर धर्म का नियंत्रण बढ़ रहा है. हर जगह धार्मिक शिक्षा का बोलबाला है. कहने को लोकतांत्रिक सरकारें शिक्षा को धर्म से मुक्त रखने की बातें करती रही हैं पर परोक्षअपरोक्ष रूप में धार्मिक शिक्षा की घुसपैठ कराई जा रही है. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी शिक्षा क्षेत्र में व्यापक बदलाव ला रही हैं  लेकिन धार्मिक शिक्षा पर भी उन का जोर है. धर्म के नाले शिक्षा की पवित्र सरिता में मिल कर निर्बाध रूप से बह रहे हैं. शुद्धीकरण के नाम पर दूषित जहर डाला जा रहा है.

मध्य प्रदेश के भाजपाई मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकारी स्कूलों में भगवदगीता की पढ़ाई की योजना का ऐलान किया तो 2014 में हार चुके राजनीतिक दल या विपक्षी सरकारों ने कोई एतराज नहीं किया. विरोध हुआ तो दूसरे धर्मों के नेताओं की ओर से हुआ पर दबा हुआ. ईसाई और मुसलिम नेताओं ने हल्ला मचाया कि केवल हिंदू धर्मग्रंथ की पढ़ाई ही क्यों, दूसरे धर्मों की पुस्तकों को भी समानरूप से पढ़ाया जाना चाहिए, यानी कट्टरपंथी फैलाओ पर बराबरी के साथ.

भाजपा तो खुल कर हिंदुत्व की शिक्षा लागू करने की पूरी कोशिश करती रही है. देश में वंदेमातरम, सूर्य नमस्कार, योग तथा पौराणिक व ऐतिहासिक पात्रों की पढ़ाई को ले कर विवाद उग्र हो रहे हैं. सरकार में चाहे कांग्रेस रही हो या भाजपा, दोनों ही अपनेअपने स्वार्थ के लिए शिक्षा में धर्म का इस्तेमाल करती आई हैं. धार्मिक शिक्षा पर मोटा खर्च किया जा रहा है.

केंद्र के तहत राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी और राज्य सरकारों के पाठ्यक्रमों पर विवाद उठते रहे हैं. ये विवाद सरकारों के बदलने पर पाठ्यक्रमों को अपने मुताबिक परिवर्तित करने पर उठते रहे हैं.

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