Inspirational Story: एक हाथ में किताबों का भारी ढेर थामे और दूसरे हाथ से पुस्तकों से भरी एक ट्रौली खींचते हुए प्रोफैसर मुसकराती हुईं क्लास में प्रवेश कर रही थीं. उन के चेहरे पर हलकी सी चहक थी, जैसे वे सभी के लिए कोई उपहार ले कर आई हों. पिछली कक्षा में उन्होंने कहा था कि अगली बार वे हमारे चयन के लिए कुछ पुस्तकें ले कर आएंगी.
‘अगली बार मैं कोई फैक्चर नहीं दूंगी,’ उन्होंने मुसकराते हुए कहा था, ‘आप सब को मेरी लाई गई किताबों में से किसी एक का चयन करना होगा, उसे ध्यान से पढ़ना होगा और फिर अपनी बातों के माध्यम से उसे प्रस्तुत करना होगा.’
इसी कारण आज वे इतनी सारी किताबों के साथ आई थीं ताकि छात्र उन में से कोई एक पुस्तक चुनें, उसे मन लगा कर पढ़ें और फिर अपने सहपाठियों के समक्ष अपने विचारों को साझ करें.
कुछ छात्र तुरंत आगे बढ़े और प्रोफैसर की सहायता करने लगे. वे ट्रौली से किताबें निकाल कर सावधानी से मेज पर सजाने लगे. उन के चेहरों पर उत्सुकता की ?ालक थी. धीरेधीरे और भी छात्र अपनी जगहों से उठे और मेज की ओर बढ़े. वे एकएक कर के पुस्तकों का अवलोकन करने लगे- कवर पलटते, शीर्षक पढ़ते, कुछ तो वहीं खड़ेखड़े प्रस्तावना या सारांश पढ़ने में लग गए.
हर कोई यह सोच रहा था कि कौन सी पुस्तक ली जाए, वह पुस्तक जिसे वह न केवल पढ़ सके, बल्कि पूरे मनोयोग और आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत भी कर सके.
यह माहौल श्वेता के लिए बिलकुल नया था. अभीअभी उस ने मास्टर्स में प्रवेश लिया था. इन आत्मविश्वासी चेहरों के बीच वह खुद को एक अपरिचित सी उपस्थिति की तरह महसूस कर रही थी. खैर, वह भी धीरेधीरे टेबल के पास पहुंची जहां किताबें करीने से सजी थीं. वह कभी कोई पुस्तक उठाती तो कोई कभी, फिर कुछ क्षणों बाद ही उसे वापस रख देती.
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