इस बार साफ देखा जा सकता है कि 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में हिंदू-मुस्लिम राजनीति की भी बड़ी भूमिका होगी. वैसे तो कहा जाता है कि बंगाल में लेफ्ट के 34 साल के शासन के समय ही चुनावों में हिंदू-मुस्लिम राजनीति का कोई खास महत्व नहीं रह गया था. ममता के 10 वर्षों के शासनकाल में भी यह मुद्दा बिल्कुल गौण दिखा. अब कम से कम साढ़े चार दशक बाद बंगाल चुनाव में जातिगत समीकरणों के तहत हिंदू-मुस्लिम राजनीति को भी इतना महत्व दिया जा रहा है.

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