Ladakh Political News: लद्दाख पर पिछले 7 साल से बातचीत चल रही थी. 22 मई 2026 को तय हुआ था कि लद्दाख को अपनी चुनी हुई विधानसभा मिलेगी लेकिन 15 अक्टूबर 2026 को गृह मंत्रालय ने NEFA जैसा ड्राफ्ट थमा दिया. जहां सारी ताकत LG और बाबुओं के पास होगी और चुनी हुई बॉडी सिर्फ रबर स्टैंप बन कर रह जाएगी. KDA यानि कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है. कहा है कि एकतरफा लिए जा रहे फैसले लद्दाख में लोकतंत्र की हत्या हैं. इस ड्राफ्ट से लद्दाख को अधिकार नहीं मिले बल्कि इसे प्रयोगशाला बना दिया गया है.
KDA ने सिर्फ प्रस्ताव खारिज नहीं किया है बल्कि पिछले 7 साल से चल रहे धोखे का गुब्बारा ही फोड़ दिया है. कहानी 2019 से शुरू होती है जब लद्दाख के लोगों ने जम्मू-कश्मीर से अलग UT बनने पर जश्न मनाया था. उन्हें लगा था अब उनका अपना हक होगा. बीजेपी सरकार ने वादा किया था कि लद्दाख को चमकाएंगे, इसे विकसित राज्य बनाएंगे लेकिन 7 साल बाद भी हुआ क्या? अब लद्दाख को बिना विधायिका वाला UT थमा दिया. न जमीन का अधिकार, न नौकरी का अधिकार और न ही अपनी भाषा और संस्कृति की सुरक्षा की गारंटी. 7 साल से लेह अपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस लगातार 4 मांगों पर लड़ रहे हैं. राज्य को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले, छठी अनुसूची में शामिल हो और अपनी जमीन-नौकरी की सुरक्षा अपनी विधानसभा से तय हो.
सरकार बातचीत का नाटक करती रही. 22 मई 2026 की मीटिंग में लिखित में समझौता हुआ. मिनिट्स 6 जुलाई को साइन हुए. तय हुआ था कि लद्दाख को एक कस्टमाइज्ड ढांचा दिया जाएगा, जिसके पास विधायी, कार्यकारी और वित्तीय शक्तियां होंगी जो चीफ सेक्रेटरी तक को कंट्रोल कर सकेगा. साथ ही यह भी तय हुआ था कि लद्दाख को आर्टिकल 371 की तर्ज पर आर्टिकल 371-K जैसा संवैधानिक सुरक्षा कवच दिया जाएगा और स्टेटहुड लद्दाख की अंतिम आकांक्षा रहेगी. सरकार के इस वादे से लद्दाख के लोगों में उम्मीद जगी थी लेकिन 15 अक्टूबर 2026 को गृह मंत्रालय ने 15 पन्ने का जो ड्राफ्ट थमाया, उसने सब उम्मीदों पर पानी फेर दिया.
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