कांग्रेस के बड़े नेता और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की "भारत जोड़ो यात्रा" धीरे-धीरे अपने उफान की और है. जहां इस यात्रा से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी और भारतीय जनता पार्टी सकते में है वहीं देश के बड़े-बड़े विपक्षी नेताओं में भी बेचैनी स्पष्ट दिखाई दे रही है. इसका मूल कारण यह है कि कांग्रेस से निकल कर या छोड़कर गए नेता या कांग्रेस के विरोध में बनाई गई पार्टीयां और उसके नेता यह चाहते हैं कि कांग्रेस हमेशा कमजोर रहे और उन्हें कांग्रेस की नहीं बल्कि कांग्रेस को उनकी दरकार बनी रहे . जब तक कांग्रेस कमजोर रहेगी उनकी हांडी की दाल पकती रहेगी और वह कभी भी प्रधानमंत्री भी बन सकते हैं.

यही कारण है कि खुलकर के भारत जोड़ो यात्रा के समर्थन में चाहे ममता बनर्जी हो या फिर शरद पवार या फिर नीतीश कुमार नहीं आ रहे हैं. क्योंकि भारत जोड़ो जात्रा से राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को एक अनोखा ऑक्सीजन मिल रहा है , लोग इस यात्रा की और आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं.यही नहीं राहुल गांधी की लोकप्रियता अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई है वही उनकी बातचीत की शैली और भाषण को सुनकर दीगर पार्टियों के नेताओं की सांसें भी फुल रही हैं. अब जब 3 तारीख को दिल्ली से चलकर के भारत जोड़ो यात्रा उत्तर प्रदेश में प्रवेश करने जा रही है जो देश का सबसे बड़ा राज्य है और जहां से देश की राजनीति को एक दिशा मिलती है तब चर्चित चेहरे मौन हो गए हैं. कांग्रेस की 'भारत जोड़ो यात्रा' में शिरकत के लिए आमंत्रित किए गए विभिन्न दलों ने अभी इसमें शामिल होने का इरादा जाहिर नहीं किया है. समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) प्रमुख जयंत चौधरी का अन्य कार्यक्रमों में व्यस्तता की वजह से इस यात्रा में शामिल होना मुश्किल बताया जा रहा है. कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई ने अखिलेश यादव और जयंत के साथ-साथ बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर और उत्तर प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री डा दिनेश शर्मा समेत विभिन्न पार्टियों के
नेताओं को तीन जनवरी को उत्तर प्रदेश में दाखिल हो रही कांग्रेस की "भारत जोड़ो यात्रा" में शिरकत करने का न्यौता दिया है मगर यह नेता "भारत जोड़ो यात्रा" में राहुल गांधी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर के चलने में गुरेज कर रहे हैं मानो उनका कद छोटा हो जाएगा.
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राहुल गांधी के पीछे, राहुल गांधी के आगे _____ _____ दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकारने में अनेक नेता असहज महसूस कर रहे हैं .पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने के बारे में कहा है - यात्रा को लेकर राहुल गांधी के भावनात्मक आहवान से उनका जुड़ाव है, लेकिन उन्हें किसी प्रकार का निमंत्रण नहीं मिला है. इस बीच सपा के एक नेता ने बताया है कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव का कार्यक्रम पहले से ही तय है और उनका कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होना बहुत मुश्किल है.वहीं रालोद के मुख्य प्रवक्ता ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि रालोद प्रमुख जयंत चौधरी यात्रा में जाएंगे. उनके तमाम कार्यक्रम पहले से ही निर्धारित हैं. जहां तक पार्टी के किसी नेता के यात्रा में शामिल होने का सवाल है, तो उसका फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत सिंह खुद करेंगे.'

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