रोमिला थापर का गुनाह इतना भर नहीं है कि वे एक परम्परागत भारतीय महिला सरीखी नहीं दिखती हैं. एक ऐसी महिला जो पहली नजर में ही किसी न किसी एंगल से निरुपा राय कामिनी कौशल या सुलोचना जैसी दयनीय भारतीय (दरअसल में हिन्दू) न दिखे बल्कि प्रिया राजवंश, सोनी राजदान या सिम्मी ग्रेवाल सी राजसी आत्मविश्वास, ठसक और चमक दमक वाली दिखे. वह किसी भी लिहाज से जेएनयू में बने रहने लायक आज के दौर में हो ही नहीं सकती. गुनाहों की देवी रोमिला थापर का एक बड़ा गुनाह यह भी है कि उन्होंने अगस्त 2018 की किसी तारीख में आज के दौर और राजकाज की तुलना आपातकाल से करते यह तक कह डाला था कि वह आपातकाल कम खतरनाक था.

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