प्याज की आसमान छूती कीमतों ने आम आदमी की रसोई से इस सब्जी को गायब कर दिया. दिल्ली एनसीआर में प्याज की कीमत 80 रूपये प्रति किलो तक जा पहुंची है लेकिन हुकूमतों का इससे कोई नाता नहीं है. ऐसा पहली बार नहीं हो रहा कि प्याज की कीमतें आसमान छू रही हों लेकिन हर बार ऐसा क्यों होता है यहां पर सवाल ये आ गया है. हालांकि सरकारें प्याज की बढ़ती कीमतों पर नकले कसने की तुरंत कोशिश में जुट जातीं हैं क्योंकि देश की आवाम ने कई सरकारों की गद्दी इसी वजह से छीन ली थी. इतिहास हमें सिखाता है. इसी इतिहास को देखते हुए राजनेता प्याज की दामों को कम करने की कवायद कर रहे हैं लेकिन इससे वो कुछ ही लोगों को लाभ पहुंचा सकते हैं. सबको नहीं. सरकार के पास न तो इतने स्टोर हैं कि हर व्यक्ति के पास आसानी से पहुंच सके न ही सरकार के पास किसी प्रकार की कोई व्यवस्था.

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