लालकृष्ण आडवाणी को बेवजह भाजपा का भीष्म पितामह नहीं कहा जाता उनका व्यक्तित्व और आचरण दोनों सचमुच में द्वापर के भीष्म से मेल खाते हैं. भीष्म विद्वान था, नीति का ज्ञाता था, साहसी योद्धा था लेकिन न्याय प्रिय नहीं था क्योंकि दुर्योधन के प्रति उसकी आसक्ति उसके तमाम गुणों पर भारी पड़ती थी. वह कभी दुर्योधन के अन्याय और मनमानी का खुलकर विरोध नहीं कर पाया. प्रसंग चाहे फिर द्रौपदी के चीरहरण का रहा हो या फिर पांडवों को परेशान कर छल कपट से उनके राजपाट छीनने का, भीष्म का समर्थन हमेशा दुर्योधन के साथ रहा. धर्म और नीति का राग अलापते रहने बाले भीष्म की हिम्मत कभी उसका विरोध करने की नहीं पड़ी और इसी मोह के चलते वह दुर्योधन के हर गलत काम का सहभागी बना.

Tags:
COMMENT