भाजपा की केन्द्र सरकार भले ही खुद को किसानों की प्रिय सरकार बता रही हो पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न राजनीतिक दल उसे किसानों की विरोधी सरकार बता रहे है. अपना दल की प्रदेश अध्यक्ष पल्लवी पटेल ने भाजपा सरकार की ‘आयुष्मान भारत’ योजना और किसानों को लेकर तमाम सवाल उठाये है.

अपना दल मण्डल एवं जिलाध्यक्षों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल एवं प्रदेश अध्यक्ष पल्लवी पटेल ने केन्द्र की भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा ‘केन्द्र सरकार के द्वारा बडे जोर शोर से शुरू की गई ‘आयुष्मान भारत’ योजना भी एक जुमला साबित होगी. भाजपा ने स्वास्थ्य, सुरक्षा और शिक्षा के बारे में अपने संकल्प पत्र में इलाज के लिए फ्री सुविधा देने की बात की थी लेकिन आज किसी भी अस्पताल में या मेडिकल कालेजों में फ्री दवाईयों की बात छोड़िये स्ट्रेचर और एम्बुलेन्स सेवा भी मुहैया नहीं हो पाती है. ‘आयुष्मान भारत योजना’ का भी वही हश्र होगा जो प्रत्येक खाता धारक के खाते में 15 लाख जमा होने का हुआ’.

अपना दल की प्रदेश अध्यक्ष पल्लवी पटेल ने कहा, ‘भाजपा सरकार ने चुनाव से पहले जो भी वादे किये उनका हश्र जनता के सामने है किसानों का कर्ज माफ हो जायेगा, किसानों की बेहतरी के लिए स्वामीनाथन आयोग लागू होगा और प्रत्येक वर्ष दो करोड़ रोजगार बेरोजगारों को दिया जायेगा कोई भी योजना धरातल पर नहीं उतरी. गांव की गरीब जनता अशिक्षित है वह इस योजना को लाभ नहीं ले पायेगी. यह योजना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ेगी.

अपना दल की राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल ने पदाधिकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मिशन 2019 लोकसभा चुनाव की कामयाबी के लिए हमें युद्ध स्तर पर संगठन को धरातल पर उतारना होगा. अपना दल की नीतियों को बताते हुए कहा कि प्रत्येक बूथ में 10 नौजवानों को बूथ पदाधिकारी बनाना होगा जिसमें एक महिला होना अनिवार्य है.

प्रदेश अध्यक्ष पल्लवी पटेल ने किसानों के मुद्दों को उठाते हुए कहा केन्द्र और प्रदेश सरकार कार्पोरेट जगत की हितैषी और किसानों, मजदूरों की विरोधी है. बीजेपी सरकार के इशारे पर आंदोलनकारी जो पैदल मार्च कर दिल्ली पहुंच रहे थे उन्हें रोककर लाठीचार्ज किया गया जो किसानों पर अत्याचार है.

कर्जमाफी से किसानों का पत्ता साफ किया गया. वहीं पर कार्पोरेट घरानों का कर्जमाफ किया गया. जो कृषि प्रधान देश के लिए बहुत बड़ी बिडंबना है किसानों की मांगें जायज थी जैसे किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी, गन्ना किसानों का बकाया भुगतान व्याज सहित, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट अक्षरशः लागू की जाए, किसानों को कृषि डीजल और कृषियंत्रों में सब्सिडी दी जाए और किसानों को पांच हार्स पावर तक बिजली मुफ्त की जाए.

किसान परिवार को पांच हजार मासिक पेंशन दी जाए और किसान आयोग बनाया जाए. इन बुनियादी मांगों के साथ किसान पदयात्रा कर रहे थे, दिल्ली बार्डर पर बीजेपी सरकार के इशारे पर पुलिस प्रशासन द्वारा बलपूर्वक रोका गया. यह लोकतंत्र की हत्या करने जैसा है. आगामी 2019 के चुनाव में भाजपा सरकार को किसान तबका सबक सिखाएगा. सरकार उद्योगपतियों का लगभग तीन लाख करोड़ कर्ज को बट्टे खाते में डाल सकती है लेकिन किसानों के 65 हजार करोड़ रुपया माफ न कर लाठी के दम पर कुचलने का काम कर रही है.

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