Andhra Pradesh population policy: उत्तर भारत में जनसंख्या बढ़ रही है तो वहीं दक्षिण के राज्य कम होती जनसंख्या से परेशान हैं. कम होती जनसंख्या को देखते हुए आंध्र प्रदेश की सरकार ने बड़े अजीबोगरीब फैसले लिए हैं. वहां की सरकार 4 बच्चे वालों को सरकारी नौकरी तक देने की बात की है. सवाल यह है कि क्या जनसंख्या बढ़ाना ही विकास का पैमाना है?
पूरी दुनिया इस वक्त पर्यावरण के खतरे से जूझ रही है और इस खतरे की बड़ी वजह जनसंख्या का बोझ है. भारत की आबादी लगभग 140 करोड़ है जिस से यहां संसाधनों का भारी असंतुलन पैदा हो गया है. एक बड़ी आबादी गरीबीरेखा से नीचे है. उत्तर भारत के दकियानूसी राज्यों में आज भी जनसंख्या बढ़ते क्रम में है लेकिन दक्षिण भारत के कुछ उदार और कर्मठ राज्यों में स्थिति उलट गई है.
इन में आंध्र प्रदेश ऐसा राज्य है जहां जन्मदर, जिसे टोटल फर्टिलिटी रेट कहते हैं, 1.5 पर आ गई है, जो 2.1 की रिप्लेसमैंट रेट से बहुत कम है. यानी, आबादी बूढ़ी हो रही है, काम करने वाले युवा कम हो रहे हैं. इस से आने वाले 20 साल में अर्थव्यवस्था और पैंशन सिस्टम पर बोझ बढ़ेगा, इसलिए आंध्र प्रदेश सरकार ज्यादा बच्चे पैदा करने पर इनाम दे रही है. तीसरे बच्चे पर मां को 30 हजार रुपए की मदद मिलेगी और चौथे बच्चे पर 40 हजार रुपए की.
असली सवाल यह है कि जो बच्चे पहले से पैदा हो चुके हैं उन के लिए सरकार की नीतियां कितनी कारगर हैं? आंध्र के ही कई गांवों में आज भी सरकारी स्कूल में टीचर नहीं, अस्पताल में डाक्टर नहीं. कुपोषण में आंध्र 15वें नंबर पर है. यहां हर तीसरा बच्चा कुपोषित है. बेरोजगारी 7.5 फीसदी है.
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