बिहार कर्मचारी चयन आयोग (बीएसएससी) की परीक्षा के पर्चा लीक कांड में आयोग के चेयरमैन सुधीर कुमार की गिरफ्तारी के बाद एक और आईएएस सीके अनिल पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है. अनिल बीएसएससी के ओएसडी हैं और उनके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी हो गया है. एसआईटी उन्हें दबोचने के लिए रणनीति बना रही है. पेपर लीक मामले में एसआईटी को अनिल के खिलाफ कई पक्के सबूत मिल चुके हैं. इससे पहले 1982 बैच के आईएएस सुधीर कुमार को हजारीबाग  से गिरफ्तार किया गया था. सुधीर को भगाने और उन्हें नया सिम कार्ड मुहैया कराने में अनिल का ही हाथ होने के सबूत मिले हैं.

सुधीर कुमार की गिरफ्तारी के बाद आईएएस लौबी और सरकार के बीच रस्साकस्सी का खेल शुरू हो गया है. आईएएस एसोसिएशन अपने साथी की गिरफ्तारी का विरोध कर रहा है और मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहा है. 26 फरवरी से ही राज्य के तमाम आईएएस काला बिल्ला लगा कर काम कर रहे हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कह रहे हैं कि वह एसोसिएशन के मेमोरेंडम का इंतजार कर रहे है, पर एसोसिएशन उनके पास नहीं जा कर राज्यपाल और बिहार विधान सभा के अध्यक्ष से मुलाकात कर रहा है. नीतीश मुस्कुराते हुए कहते हैं-‘मुझसे न कोई मिलने आया और न ही मेमोरेंडम ही भेजा गया’. 26 फरवरी को आईएएस एसोसिएशन के 100 सदस्यों ने राजभवन के सामने एक दूसरे का हाथ थाम कर श्रृंखला बनाई और राज्यपाल से गुहार लगाई कि मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए. एसोसिएशन के सचिव विवेक सिंह की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात की. एसोसिएशन ने यह भी फैसला लिया है कि सरकार के किसी भी मौखिक आदेश को नहीं मानेंगे.

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