बात 5 अगस्त 2013 की है. इस दिन इलाहाबाद के गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान ने दावा किया था कि राहुल गांधी ने उनके एक समारोह में यह बयान दिया है कि गरीबी सिर्फ एक मानसिक अवस्था है. बक़ौल राहुल गांधी, जब तक कोई शख्स खुद में आत्मविश्वास नहीं लाएगा तब तक वह गरीबी के मकड़जाल से बाहर नहीं निकल पाएगा. कोई शक न करें इसलिए तब उक्त संस्थान ने बाकायदा प्रेस नोट जारी भी किया था जिसकी लोकतन्त्र में अहमियत किसी हलफनामे से कम नहीं होती.

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