Student Issues: देश की लोकतांत्रिक परंपराओं में एक नया अध्याय जुड़ गया है - अब छात्रों के मुद्दों पर चर्चा करने की सहमति भी अपने आप में एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जाने लगी है. नीट पेपर लीक को लेकर देशभर में उबलते गुस्से, छात्रों के भविष्य पर लटकते अनिश्चितता के बादल और विपक्ष के लगातार हंगामे के बीच आखिरकार केंद्र सरकार ने यह ऐतिहासिक फैसला लिया कि इस पर बात की जा सकती है.
22 जुलाई की दोपहर, जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, सदन का माहौल कुछ वैसा ही था जैसा परीक्षा के रिजल्ट वाले दिन होता है - तनावपूर्ण, उम्मीद भरा और थोड़ी-सी औपचारिक गंभीरता से लिपटा हुआ. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गंभीर मुद्रा में घोषणा की कि उन्होंने सभी पक्षों की बात सुन ली है और सरकार भी 'खुले मन से' चर्चा के लिए तैयार है. यह वही ‘खुला मन’ है जो आमतौर पर बहुत ज़रूरी मुद्दों के सामने आते ही अचानक छुट्टी पर चला जाता है, लेकिन आज विशेष अवसर पर वापस बुला लिया गया था. क्योंकि आज अगर ये मन न दिखता तो सरकार की गद्दी हिलाने के लिए सड़क से संसद तक इंतजाम पूरे हैं, इसका डर सरकार को था. संसद की कार्रवाई शुरू होने से पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से जाकर मिलना भी सरकार की धुकधुकी का कुछ इशारा करता है.
इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को बयान देने का अवसर दिया गया. रिजिजू ने बड़े संतुलित शब्दों में कहा कि सरकार नीट पेपर लीक पर चर्चा के लिए तैयार है. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि चर्चा किस नियम के तहत होगी, कब होगी, और कितनी देर चलेगी क्योंकि लोकतंत्र में चर्चा का स्वरूप तय करना भी एक अलग चर्चा का विषय होता है.
आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
डिजिटल
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
- 24 प्रिंट मैगजीन





