दरअसल में सारा दोष उस भारी भरकम बहुमत का है जो भाजपा से संभाले नहीं संभल रहा है. रेल मंत्री भी इससे अछूते नहीं हैं, जिन्हें मालूम है कि देश के बेरोजगार युवाओं ने बड़ी उम्मीद से दोबारा कमल का फूल यह सोचते खिलाया हैं कि अच्छे दिन मानसून की तरह कहीं अटक गए होंगे. इसमें बेचारे मोदी जी या उनकी सरकार का क्या कुसूर जो पूरे पांच साल काम धाम छोड़ पूजा पाठ में लगे रहे. ऊपर वाले से गुहार लगाते रहे कि प्रभु हमारी तो वोटों से भर दी. अब इन बेरोजगारों की झोली भी रोजगार से भर दो क्योंकि हम घंटे घड़ियाल तो बजा सकते हैं लेकिन पिचके गालों वाले इन नौजवानों का पेट भरने का इंतजाम नहीं कर सकते .

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