इसराईल और फिलिस्तीन के बीच 11 दिनों तक चला खूनी संघर्ष थम गया. अंतर्राष्ट्रीय दबाव के चलते आखिरकार इसराईल ने गाजा पट्टी में सैन्य अभियान को रोकने के लिए 21 मई से सीजफायर का ऐलान कर दिया. गाजा पट्टी से हमास के अधिकारियों ने भी लड़ाई रोकने की पुष्टि कर दी. इसराईल और फिलिस्तीन के बीच जारी जंग को खत्म करने के लिए अमेरिका का भारी दबाव इसराईल पर था. पहले इसराईल ने अमेरिकी अपील को नकार दिया था और लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाने की बात कही थी लेकिन बाद में इसराईल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की हाईलैवल सिक्योरिटी कैबिनेट के मंत्रियों ने सर्वसम्मति से गाजा में सीजफायर के समर्थन में वोट किया.

इसराईल के रक्षा अधिकारियों ने मंत्रियों के सामने ब्रीफिंग करते हुए कहा कि इसराईल ने फिलिस्तीनी आतंकी समूह हमास के खिलाफ तटीय इलाके में सभी संभावित उपलब्धियों को हासिल कर लिया है (जैसा कि उस की मंशा थी). हमारे हमलों से हमास काफी डर गया है और उसे काफी चोट पहुंची है.

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इसराईल और फिलिस्तीन के बीच भीषण संघर्ष की शुरुआत तो पहली रमजान को ही हो गई थी जब इसराईली पुलिस ने येरुशलम की अलअक्सा मसजिद में घुस कर तोड़फोड़ मचाई और वहां लगे लाउडस्पीकर के केबल काट कर पूरे परिसर में तांडव किया था. इस का बदला लेने के लिए फिलिस्तीन की गाजा पट्टी से हमास, जिसे आतंकी संगठन कहा जाता है, ने इसराईल के खिलाफ मोरचा खोल दिया. इसराईल को शायद इसी मौके का इंतजार था. देखते ही देखते उस के लड़ाकू विमान फिलिस्तीन पर मिसाइल हमले कर के तबाही मचाने लगे. वहीं, गाजा पट्टी से हमास भी लगातार इसराईल पर रौकेटों की बारिश करने लगा.

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