Indian Politics: नरेंद्र मोदी के 12 साल के प्रधानमंत्रित्व काल का खूब प्रचार चल रहा है. टाइम्स औफ इंडिया जैसे बड़ेबड़े तमाम अखबारों में फ्रंट पेज पर 12 वर्षों की उपलब्धियों का ढिंढोरा पीटा गया. राम मंदिर, धारा 370 जैसे कामों को गिनाया जा रहा है जबकि नोटबंदी, बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई, बढ़ती सांप्रदायिकता, शिक्षा का लगातार गिरता स्तर और रुपए की लगातार गिरती वैल्यू जैसी विफलताओं को छिपाया जा रहा है. जिन उपलब्धियों का ढोल पीटा जा रहा है, उन की जमीनी हकीकत क्या है, आइए जानते हैं.

सारे धर्मों ने हमेशा अपनी महानता का ढोल पीटा है. हमारे देश में आज की राजनीति भी ढोल पीटने पर टिकी है. जब आप के पास तथ्य न हों तो महानता का ढोल पीटना बहुत आसान काम है. गौरव का ढोल तो कभी संस्कृति और सभ्यता का ढोल धर्म से सीखें. बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ, यह किसी ने नहीं देखा, लोगों को बुद्ध ने बताया. मूसा को 10 कमांडैंट मिले, लोगों ने नहीं देखा, मूसा ने खुद ही ढोल पीटा. हजरत मुहम्मद को गुफा में जिब्रील मिले, किसी ने नहीं देखा, हजरत मुहम्मद ने ही कहा.

असल में ढोल पीटने का यह खेल बेहद पुराना है. राजा अपने चक्रवर्ती होने का ढोल पीटते रहे. पुरुष अपनी मर्दानगी का ढोल पीटते रहे. ऊंची जाति अपनी श्रेष्ठता का तो अमीर अपने रुतबे का ढोल पीटते रहे. असल में ढोल वही पीटता है जो अंदर से खोखला होता है. सच को ढोल की जरूरत नहीं होती लेकिन ?ाठ के लिए ढोल पीटना जरूरी होता है. थौमस अल्वा एडिसन के नाम पर कोई ढोल नहीं पीटा जा रहा जिन्होंने बिजली ईजाद की. आज नरेंद्र मोदी अपने

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