Europe Heatwave Crisis: पिछले दिनों फ्रांस में भीषण गर्मी (हीटवेव) के कारण 1,000 से ज्यादा लोग मर गए. यह संख्या बढ़कर करीब 2,025 मौतों तक पहुंचने की बात कही जा रही है. अधिकांश मृतक 65 वर्ष से अधिक आयु के हैं. असहनीय गर्मी के कारण लोगों में हीट स्ट्रोक, निर्जलीकरण, हृदय और गुर्दे की समस्याएं पैदा हुईं और उनकी जानें चली गयीं. फ्रांस में जून के अंत में तापमान कई क्षेत्रों में 40 डिग्री सेंटीग्रेड से ऊपर था. गर्मी के साथ-साथ जंगलों में आग, अस्पतालों पर बढ़ता दबाव और आपातकालीन सेवाओं पर भारी बोझ भी देखने को मिला.
जलवायु परिवर्तन की चेतावनी
कभी दुनिया के सबसे सुहावने मौसम वाले महाद्वीप के रूप में पहचाना जाने वाला यूरोप अभूतपूर्व गर्मी की मार झेल रहा है. जिन देशों की पहचान कभी बर्फ़, हरियाली और संतुलित जलवायु से होती थी, वहां तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है. फ्रांस, स्पेन, इटली, ग्रीस, पुर्तगाल और जर्मनी जैसे देशों में हीटवेव जनमानस को बेचैन किये हुए है.
हम यह सोच सकते हैं कि हमारे यहां तो 40 या 45 डिग्री तापमान होना आम बात है, फिर यूरोप क्यों बौखला रहा है? असल में यूरोप का मौसम हमेशा ठंडा रहा है और वहां मकान ठंड से बचने के हिसाब से बने हैं. घर इस तरह बने हैं कि बाहर की गर्मी को अंदर ही रोक लें. ऐसे में जब वहां अचानक इतनी भयंकर गर्मी पड़ रही है, तो उनके घर भट्टी की तरह तप रहे हैं. फ्रांस में केवल बीस प्रतिशत आबादी के पास ही घरों में एयर कंडीशनर हैं, इसलिए लोग इस अचानक आई मुसीबत को झेल नहीं पा रहे हैं.
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