Iran Israel Conflict: ‘‘लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में, यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है.’’ मशहूर शायर राहत इंदौरी का यह शेर आज के वैश्विक हालात की तसवीर बयां करता है. यह सिर्फ एक काव्य पंक्ति नहीं, बल्कि एक गहरी चेतावनी है कि जंग कभी सीमित नहीं रहती है, उस की आग धीरेधीरे हर सरहद, हर समाज और हर अर्थव्यवस्था को अपनी चपेट में ले लेती है. आज ईरान के साथ इजराइल और अमेरिका का संघर्ष यह दर्शाता है कि लड़ाई भले 3 देशों के बीच शुरू हुई, लेकिन इस के असर ने पूरे पश्चिम एशिया को झकझोर दिया है. इस जंग की वजह से ईरान, लेबनान ही नहीं बल्कि सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन जैसे कई खाड़ी देश भारी असुरक्षा, तबाही और अस्थिरता की गिरफ्त में हैं.
आम जनता पर बुरा असर
जंग के कारण दुनियाभर में तेल उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हुई है, महंगाई बढ़ी है और उस का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था व आमजन पर पड़ रहा है. पूरी दुनिया में तेल और गैस आपूर्ति ही बाधित नहीं हुई है बल्कि आमजन की रोजमर्रा की जरूरत का अरबोंखरबों रुपयों का सामान भी स्ट्रेट औफ होर्मुज में फंसे जहाजों में सड़ गया और सड़ रहा है.
भारत में व्यापक असर
भारत ने भले इस जंग से खुद को दूर रहने की कोशिश की लेकिन जंग का व्यापक प्रभाव यहां की जनता पर भी पड़ रहा है. खाना पकाने की गैस की किल्लत ने घर और खानेपीने की दुकानों, रैस्टोरैंट, होटलों, ढाबों आदि के चूल्हे ठंडे कर दिए गए हैं. लोग गैस का एक सिलैंडर पाने के लिए रातरात भर लाइन में लगे हुए हैं. गरीब तबका जो खाने की ठेली लगाता है, उस के घरों में तो फांकों की नौबत आ चुकी है.
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