नए साल के पहले दिन मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पुरी के समुद्र किनारे कुर्सी डाल कर बैठे चिंतन मनन कर रहे थे जिसकी उन्हें इन दिनों सख्त जरूरत भी है. दर्शन शास्त्र के छात्र रहे शिवराज सिंह को समझ आ रहा है राजनीति अनिश्चितताओं का समुच्चय है, जिसमें  एक झटके में सारा वैभव छिन जाता है, ठीक वैसे ही जैसे कभी कभी एक झटके में मिल भी जाता है. लोकतांत्रिक राजनीति में भाग्य ब्रह्मा नहीं बल्कि वोटर लिखता है, यह बात भी उन्हें बीती 11 दिसंबर को समझ आ गई थी जब राज्य में न भाजपा की सरकार रही थी और न वे मुख्यमंत्री रह गए थे. वोटर ने उन्हें खारिज कर दिया था.

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