Paper Leak Cases: पेपर लीक का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. पिछले 5 सालों में 40 से ज्यादा बड़े पेपर लीक हो चुके हैं, जो करोड़ों स्टूडैंट्स के भविष्य को बरबाद कर चुके हैं. नीट, यूपी पुलिस भरती, बीपीएससी जैसी परीक्षाओं में घोटाले आम हो गए हैं. लाखों युवा सालों की मेहनत गंवा बैठते हैं लेकिन दोषियों पर सख्त कार्रवाई के बजाय मामला दबाने की कोशिश होती है.
शिक्षा व्यापार बन गई है. अमीरों के बच्चे कोचिंग, पैसे और सिफारिश से आगे निकल जाते हैं जबकि गरीब और मिडिल क्लास के बच्चों को मिडडे मील के अलावा कुछ हासिल नहीं होता. सत्ता और धर्म का गठजोड़ कभी भी जनता के हित में नहीं होता. धर्म हमेशा से जनता को शिक्षित होने से रोकता है ताकि वे शोषण को चुनौती न दे सकें. बीजेपी राज में यही हो रहा है.
सरकारी आंकड़ों में बेरोजगारी 5 प्रतिशत के आसपास दिखाई जाती है जबकि असलियत यह है कि करोड़ों युवा बेकार बैठे हैं. मोदी सरकार ने 2014 में 2 करोड़ नौकरियां सालाना देने का वादा किया था लेकिन हकीकत इस के उलट है. कृषि से बाहर निकलने वाले नौजवान इंडस्ट्रीज में जगह नहीं बना पा रहे. पूंजीपति और बड़े कारोबारियों को टैक्स छूट और सब्सिडी दी जा रही है लेकिन छोटे उद्योग और आम लोग बरबाद हो रहे हैं. इसी वजह से आर्थिक असमानता ब्रिटिश राज से भी बदतर स्थिति में पहुंच चुकी है.
जब सत्ता पूंजीपतियों के इशारों पर काम करने लगे तो वैलफेयर स्टेट की अवधारणा मर जाती है और पूंजीवाद हावी हो जाता है. ऐसे में मुनाफा बढ़ाने के लिए मेहनत की कीमत घटाई जाती है और बेरोजगारी बढ़ाई जाती है. बीजेपी की मेक इन इंडिया और निजीकरण की नीतियां इसी का हिस्सा हैं.
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