Supreme Court: कभी-कभी न्याय की यात्रा भी दिलचस्प मोड़ लेती है. चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत की जिस टिप्पणी में युवाओं के लिए ‘कॉकरोच’ शब्द के इस्तेमाल ने देश भर के युवाओं के गुस्से को हवा दी, जिस गुस्से ने सड़कों पर प्रदर्शन की शक्ल इख्तियार की और जिस प्रदर्शन पर पुलिस की बर्बरता के खिलाफ लोग सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंचे और दुत्कारे गए, उसी घटनाक्रम में अब चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अदालत को 'लोकतंत्र में विरोध की अहमियत' याद दिलानी पड़ रही है.

गौरतलब है कि छात्रों पर पुलिस बर्बरता का मामला जब पहले अदालत के सामने लाया गया था, तब याचिकाकर्ता की बात सुनने और हिंसा के वीडियो तक देखने से सुप्रीम कोर्ट ने इंकार कर दिया था और कहा था कि हमारा वक्त न बर्बाद करें. अब वही मामला अदालत की गंभीर सुनवाई के केंद्र में है और संदेश है - 'लोकतंत्र में इस तरह के आंदोलन होते रहेंगे'

देर से सही, लेकिन संदेश महत्वपूर्ण है

सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई को निर्देश दिया कि दिल्ली के जंतर-मंतर और विभिन्न राज्यों में हालिया प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ फिलहाल कोई दंडात्मक या जबरन कार्रवाई न की जाए. हिरासत में लिए गए सभी नाबालिगों को तत्काल रिहा करने का निर्देश भी कोर्ट ने दिया है. हालांकि आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को इस राहत से बाहर रखा गया है.

यह फर्क लोकतंत्र की बुनियादी समझ के लिए जरूरी है. प्रदर्शन करना अपराध नहीं है. सरकार से असहमति जताना, नारे लगाना या उसकी नीतियों के खिलाफ सड़क पर उतरना लोकतांत्रिक अधिकारों के दायरे में आता है. लेकिन हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ या पुलिस पर हमला उसी अधिकार का विस्तार नहीं माना जा सकता है. इसलिए अदालत का काम दोनों के बीच वह रेखा खींचना है जिसे राजनीतिक उत्तेजना और पुलिसिया कार्रवाई के बीच अक्सर मिटा दिया जाता है.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
USD99USD49
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
 

डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
USD150USD129
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
  • 24 प्रिंट मैगजीन
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...