जिन ज्ञानियों और ऋषिमुनियों टाइप के विद्वानों को यह शक हो गया था कि अब भाजपा सत्ता में नहीं आ पाएगी और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे उन में एक चौंका देने वाला नाम योगगुरु और कारोबारी बाबा रामदेव का भी था जिन्होंने अपनी इन भड़कती भावनाओं को सार्वजनिक रूप से व्यक्त करने की चूक भी कर दी थी. अब बाबा पछता रहे हैं और रंगमहल में घुसने के लिए अपने साइज का छेद ढूंढ़ रहे हैं जिस से पतंजलि के कथित बढ़ते घाटे को मुनाफे में बदला जा सके.

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