England Peasants Revolt: आम तौर पर सभी ऐसा मानते है कि अतीत या इतिहास की घटनाओं से हर राजतंत्र और लोकतंत्र के शासकों को सबक सीखना चाहिए. मगर अफसोस निरंकु शासक इस कटु सत्य की कभी परवाह नही करते. बल्कि सच तो यह है कि वर्तमान समय में लोकतंत्र के नाम पर राजशाही से भी ज्यादा क्रूरतापूर्ण शासन चलाया जा रहा है.
20 जुलाई 2026 को जंतर मंतर पर जनरेषनल जेड और युवा पीढ़ी के आंदोलन के वक्त केंद्रीय सरकार ने जो कुछ किया और फिर आज दस अक्टूबर 2026 को केंद्रीय सरकार जिस तरह के कदम उठा रही है, वह हमें इंग्लैंड में 1381 में किंग रिचर्ड द्वितीय के षासन काल में हुए खूनी ‘‘पीजेंट रिवेाल्ट’ की याद दिलाता है. हम तो यह भी मानने को तैयार हैं कि सत्ता से जुड़े लोगों ने 1381 को इतिहास नही पढ़ा होगा. लेकिन ‘‘बॉर्न सुप्रीमेसी’ और ‘ कैप्टन फिलिप्स’ जैसी अति लोकप्रिय हौलीवुड फिल्मों के निर्देषक पॉल ग्रीनग्रास 14 वीं षताब्दी में इंग्लैंड के राजा किंग रिचर्ड द्वितीय के जनता के दमनकारी कानून के खिलाफ एक किसान द्वारा की गयी खूनी बगावत व अषांत दौर को बड़े परदे पर बेहद क्रूर और सजीव रूप से अपनी फिल्म ‘‘द अपराइजिंग’’ में चित्रित किया है,जो कि 18 सितंबर 2026 को भारत सहित पूरे विष्व में रिलीज हुई.इस फिल्म ने भारत में अपार सफलता बटोरी.
जिन्हे 1381 के ‘पीजेंट रिवोल्ट’ की जानकारी नही है,मगर फिल्म ‘द अपराइजिंग’ देख चुके लोग सोच रहे है कि हमारी सरकार तो किंग रिचर्ड द्वितीय के ही पदचिन्हो पर चल रही है.पर हमें यह नही भूलना चाहिए कि किंग रिचर्ड द्वितीय उस वक्त महज 14 साल की उम्र के षासक थे. पहले किंग रिर्चड द्वितीय भी इस आंदोलन से जुड़े लोगो के साथ वैसा ही कदम उठाते हैं,जैसा कि हमारी सरकार ने 20 जुलाई के जंतर मंतर आंदेालन के वक्त उठाया था. बच्चों पर लाठियां व पैलेट गन चलवाने के बाद सरकार ने काक्रोच जनता पार्टी की मांग को स्वीकार करते हुए षिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा दिलवा दिया था. लेकिन बाद में 14 साल के राजा किंग रिर्चड द्वितीय को अहसास हुआ कि इस तरह वह तो अपने सलाहकारेा के अनुसर काम कर रेह हकं,उनकी अपनी अहमियत और उनका अपना अस्तित्व भी कुछ है या नही..उसके बाद किंग रिचर्ड द्वितीय ने लाखों लोगाें को जिस अंदाज में मौत की नींद सुलाया था,लगभग वही नौ अक्टूबर और आज दस अक्टूबर को हमारी केंद्रीय सरकार करते हुए नजर आ रही है.
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