Operation Sindoor: प्रधानमंत्री ने अपनी पूर्ववर्ती स्टाइल में फिर दोहराया कि उन्होंने आतंकवादियों को पनाह देने वालों को सबक सिखाने के लिए औपरेशन सिंदूर और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे कदम उठा कर देश को सुरक्षित बनाया. आज तक यह साबित नहीं हुआ कि कौन सा आतंकवादी पाकिस्तान में ट्रेनिंग ले कर और कैसे बौर्डर क्रौस कर यहां बालाकोट सुरक्षित पहुंचा और अपनी आतंकी करतूत को अंजाम दिया.
जो कुछ भी सरकारी बयानों से मिलता है वह सिर्फ चुनावी सभाओं में या चुनावपूर्व सभाओं में मिलता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ये दावे उसी तरह के हैं जैसे वर्ष 2002 में 4 सितंबर को न्यूयौर्क के वर्ल्ड ट्रेड सैंटर पर हुए आतंकवादी हमले का जिम्मेदार इराक, लीबिया को ठहरा कर वहां चढ़ाई कर दी और भारी बमबारी कर तत्कालीन राष्ट्रपति जौर्ज बुश ने अमेरिकी ताकत दिखाई.
जौर्ज बुश के विपरीत बराक ओबामा ने अपने राष्ट्रपति काल में चुपचाप ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान स्थित अड्डे पर हमला कर मार डाला और उस की लाश को समुद्र में डुबो दिया. उस के बाद भी अमेरिका का पाकिस्तान से कोई बैरभाव नहीं रहा और आजकल डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तानी नेता व जनरल गलबहियां डाले घूमते हैं.
पाकिस्तान को शत्रु घोषित कर के उस पर विजय पा लेना भारतीय जनता के किसी काम का नहीं है. यह युद्ध उसी तरह का निरर्थक है जैसा राम का रावण से और पांडवों का कौरवों से था. दोनों पैराणिक कथाओं में जनता कहीं नहीं आती. दोनों युद्ध 2 तरफ के एक ही मिटटी से जुड़े राजाओं के अपने निजी कारणों से लड़े गए थे. लेकिन आज भी जनता न जाने क्यों इन्हें अपनी जीत मानती है.
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