Right to Protest in India: दिल्ली किसी राजनीतिक दल की जागीर नहीं है. यह संसद, सर्वोच्च न्यायालय, निर्वाचन आयोग और अन्य अनेक महत्वपूर्ण संस्थानों का केंद्र है.राजधानी पर हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, चाहे वह किसान हो, मजदूर हो, छात्र हो, महिला हो, बेरोजगार युवा हो या किसी राजनीतिक दल का समर्थक. यहां किसी को प्रवेश करने से कोई रोक नहीं सकता है.
लोकतंत्र में प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है. संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण ढंग से, बिना हथियारों के एकत्र होने का अधिकार देता है. हालांकि इन अधिकारों पर कानून के तहत कुछ प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, लेकिन प्रतिबंधों का इस्तेमाल शांतिपूर्ण असहमति को कुचलने के औजार के रूप में नहीं हो सकते हैं.
सवाल यह है कि जब लोग अपनी शिकायत लेकर राजधानी आते हैं, तो मोदी सरकार उनसे बातचीत करने के बजाय उन्हें रोकने की रणनीति क्यों अपनाती है?
किसानों के आंदोलन के दौरान भी दिल्ली की सीमाओं पर बैरिकेडिंग, अवरोधक और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था मोदी सरकार ने की. सड़कों पर बड़ी बड़ी कीलें ठोंक दीं कि किसानों के ट्रैक्टर न चल सकें. दिल्ली की सीमाओं पर खुले आकाश के नीचे साल भर किसानों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन किया. मोदी सरकार द्वारा किसानों पर जबरन थोपे गए तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग के साथ चले इस आंदोलन में अनेकों किसानों ने अपनी जान दी. आखिर नवंबर 2021 में मोदी सरकार ने हार कर तीनों कानून वापस लिए.
यह घटना बताती है कि किसी आंदोलन को केवल पुलिस बल के सहारे समाप्त नहीं किया जा सकता है. आप जनता के सवालों को पुलिस के दम पर एक दिन कुचल सकते हैं, दो दिन, तीन या चार दिन ऐसा कर लेंगे मगर पुलिस या अर्धसैनिक बल सालभर दिल्ली की चौकसी में नहीं लग सकते हैं. जनता की मांगों को सुनना और उचित समाधान निकालना ही स्थायी रास्ता है.
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